Culture and environment

रविवार, 18 मई 2025

हम माली हैं पुण्य धरा के

*हम माली हैं पुण्य धरा के* 
            -उमराव सिंह वर्मा

हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।

हम सब मिलकर एक बने अब, पुकार रही है धरती हृदय से।
पानी बिन सब सूना पड़ा है, आओ लगाएं पेड़ जतन से।
तपती दहकती इस ज्वाला को, आओ हम शांत करें पेड़ों से।
जंगल भी अब सीमट रहे हैं, नदी तरू सब सूख रहे हैं 
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।

नन्हे नन्हे पौधों से अब, आओ धरा का श्रृंगार करें हम।
अनाचार ने लूटी है मानवता, आओ मिलकर मिटाएं जड़ से।
सूख रही है धरती आज, टूट रहा परिवार बहुत है।
जीवों का आशियाना टूटा, गौ माता दर दर भटक रही हैं।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।

जब होगी यह पुण्य धरा में, मानवता का संचार तेजी से।
तब हम सीना तान कहेंगे, हम सब आज एक बने हैं।
कोई दानव तोड़ ना ले, हमारी खुशियां इस उपवन से।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
                 
           ------------*****-----------
©Copyrightumraosinghverma

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें