सोमवार, 26 मई 2025

सदगुरु कबीर साहेब के 627वें प्रगट उत्सव और बरसाईत महोत्सव पर करोड़ों भक्तों में उत्साह : उमराव सिंह वर्मा

सदगुरु कबीर साहेब के 627वें प्रगट उत्सव और बरसाईत महोत्सव पर करोड़ों भक्तों में उत्साह : उमराव सिंह वर्मा


सतगुरु कबीर साहब के सिद्धांतों और वाणीवचनों का अनुसरण और अनुकरण पूरे विश्व में किया जाता है साहेब कबीर के प्रकट उत्सव को ही बरसाईत महोत्सव के रूप में मनाया जाता है इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या 26 मई सोमवार से ज्येष्ठ पुर्णिमा तक 627वें प्रगट उत्सव एवं बरसाईत महोत्सव के अवसर पर कबीरपंथियों में काफी उत्साह एवं हर्षोल्लास है इस अवसर पर मानववैज्ञानिक एवं परामर्शदाता उमराव सिंह वर्मा ने कहा कि प्रतिवर्ष बरसाईत महोत्सव ज्येष्ठ अमावस्या से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक 15 दिनों का होता है इसके अंतर्गत पुरे विश्व में सदगुरु कबीर साहब के मानने वालों के द्वारा विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें सत्संग समारोह, गुरु महिमा पाठ, संत महात्माओं के द्वारा भजन गायन, प्रवचन, भोजन भंडारा मिठाई वितरण, भव्य शोभा यात्रा,  महाप्रसादी, शरबत वितरण, सम्मान समारोह, चौका आरती आदि के द्वारा सदगुरु कबीर साहब के प्रगट उत्सव और बरसाईत महोत्सव को बहुत ही विशेष महत्व और गरिमामय ढंग से मनाया जाता है कबीर साहब ने मध्यकालीन समाज में व्याप्त बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड पर तीखा प्रहार करते हुए सबसे पहले सामाजिक ऊंच-नीच, सामाजिक बुराईयों, जाति प्रथा, भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाएं, साहेब कबीर के विचारों, शिक्षाओं, सिद्धांतों और वाणिवचनों का आज विश्व के करोड़ों लोगों द्वारा अनुसरण और अनुकरण किया जा रहा है और तमाम तरह के अंधविश्वासों, बुराईयों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि साहेब कबीर दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाएं हैं वे प्रेम, दया, करूणा और भक्ति पर जोर देते हैं। आज भारतीय समाज पर सद्गुरु कबीर साहब के सिद्धांतों का महत्वपूर्ण प्रभाव देखा जा सकता है। सदगुरु कबीर साहब के वाणिवचनों, सिद्धांतों और शिक्षाओं का प्रथम प्रचार प्रसार उनके प्रधान शिष्य धनी धर्मदास जी साहब एवं वंश बयालीस के परंपरा के अनुसार हो रहा है, क्योंकि सदगुरु कबीर साहब की समस्त वाणी-वचनों का संकलन और उसे लिपिबद्ध करने का कार्य धनी धर्मदास जी साहब के द्वारा किया गया। आज श्री सदगुरू कबीर धर्मदास वंशावली प्रतिनिधि सभा दामाखेड़ा जो कबीरपंथ का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय एवं तीर्थस्थल है यहां पुरे विश्व से सदगुरु कबीर साहब के नेमी प्रेमी भक्तजन प्रतिवर्ष पधारते हैं और वंश बयालीस परंपरा के अनुसार पन्द्रहवे वंशाचार्य परम पूज्य पंथश्री हुजूर प्रकाशमुनि नाम साहब एवं सोलहवें नवोदित वंशाचार्य परम पूज्य पंथश्री उदितमुनि नाम साहब विराजमान हैं। और सदगुरु कबीर साहब के उपदेशों और सिद्धांतों का अनुकरण एवं अनुकरण पुरे विश्व में होने के साथ-साथ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, लोग नैतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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