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Culture and environment
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गुरुवार, 25 सितंबर 2025
रविवार, 24 अगस्त 2025
तीजा पोरा तिहार ल तिहार के राजा केहे जाथे
तीज़ा पोरा तिहार ल तिहार के राजा कहे जाथे
आलेख - उमराव सिंह वर्मा, परामर्शदाता, परिवार न्यायालय
भादो महिना के अमावस्या के पोरा तिहार अऊ शुक्ल पक्ष, तृतीया के तीजा तिहार मनाए जाथे अऊ दुनो ल एक संग तीजा पोरा केहे जाथे । तीजा के तईयारी ह आठेकनहईया के बाद से शुरू हो जथे, जब दाई बहिनी मन अपन ददा या भाई के रस्ता देखे बर शुरू कर देथे । छत्तीसगढ़ के संस्कृती अऊ लोक जीवन म तिहार के बहुत महत्व हे, तिहार ह लोगन ल एक-दूसर से जोड़े के माध्यम घलो आए, अपन सबो नता रिश्ता ल समय दे के परब आए, नता रिश्ता के अहमियत अऊ पहचान के उत्सव हरै। पोरा तिहार म कुम्हार भाई मन ह माटी के एक पात्र बना के देथे, जेन ल पोरा केहे जाथे, छत्तीसगढ ह खेती-किसानी के राज्य हरै, इही दिन किसान भाई मन बईला के पुजा करथे, जेन ह पशु बर सम्मान के प्रतीक आए, इही दिन कुम्हार समाज के भाई मन माटी से बईला के प्रतीक रूप बना के घर घर पहूंचाए ल जाथे, आजकाल बाजार म घलोक मिल जथे, अऊ एकर पोरा तिहार के दिन एकर पुजा करे जाथे । तीसरईया दिन ले तीजा ह शुरू होथे, जेन ल माता बहिनी मन करेला साग के संग म भात अऊ रोटीपीठा खा के शुरू करथे, ये तिहार के रौनक ह बाकी तिहार ले जादा होथे काबर कि ससुराल ले खासकर तीजा तिहार म खुशी-खुशी मईके जाए के अलग ही उत्साह होथे। ये तिहार के खास बात ये हरै कि ये तिहार के मान्यता हवै कि माता बहिनी मन पति की लंबी उमर अऊ सुख समृद्धि के कामना बर सोलह श्रंगार करके, बिना पानी पिए उपास रहिथे, अऊ फरहार करे के पहिली मइके के लुगरा ह ये तिहार के संस्कृति ल पुरा कर देथे। पति-पत्नी के रिश्ता ह बहुत अधिक विश्वास के रिश्ता आए अऊ ये विश्वास के डोरी ल मजबूत करे म ये तिहार के विशेष जगहा हवै । फेर दुख वो समय म होथे जब शराब, शक, अपमान, दुसर लोगन के भड़काए, आजकाल मोबाइल जइसे बहुत कन कारण से पति-पत्नी के रिश्ता म दुरी आ जथे, अऊ रिश्ता म कड़वापन आ जथे, छोटे-छोटे बात ह कब बड़े रूप ले लेथे, ये पता हीं नहीं चल पावै, अइसे कतको कारण ल धियान देते हुए ये तिहार ह पति-पत्नी के रिश्ता ल समझे अऊ भावनात्मक जुड़ाव लाए बर विशेष भूमिका निभाथे। सबो तिहार अऊ परब ह हमर संस्कृति ल एक पीढ़ी ले दुसर पीढ़ी म ले जाए के बुता घलो करथे । जेन ल आने वाला पीढ़ी ह अपन इतिहास अऊ संस्कृति के रूप म प्रचलन म रखथे, वो संस्कृति ल नवा पीढ़ी ह सहेज के राखथे।
उमराव सिंह वर्मा, सेमरिया, बेमेतरा (छ.ग) 6263219281
गुरुवार, 10 जुलाई 2025
रविवार, 6 जुलाई 2025
बुधवार, 28 मई 2025
पर्यटकों को प्राकृतिक धार्मिक स्थलों की ओर आकर्षित करता है प्री मानसून सीजन : उमराव सिंह वर्मा
*पर्यटकों को प्राकृतिक धार्मिक स्थलों की ओर आकर्षित करता है प्री मानसून सीजन : उमराव सिंह वर्मा*
आज हम सभी जलवायु परिवर्तन के उस दौर से गुजर रहे हैं जो प्रत्येक तीस वर्षों में होता है। जी हां ! आज का जलवायु और मौसम पिछले तीस वर्ष पहले के जलवायु और मौसम से बिल्कुल अलग है, पहले हिन्दी के बैशाख और ज्येष्ठ का महीना ग्रीष्मकाल में सबसे अधिक तापमान वाला मौसम हुआ करता था, आषाढ़ और सावन सबसे अधिक बारिश वाला महीना होता था परन्तु अब ऐसा नहीं है अब पहले का बैशाख और ज्येष्ठ जिसमें नौ तपा में लोगों की जीवनशैली बदल जाती थी, लू और भयंकर धुप से बचने के लिए प्याज रखना, चेहरे और सिर को कपड़ों से ढकना आम बात होती थी परन्तु आज बैशाख और ज्येष्ठ के महिने में तेज आंधी तूफान और बारिश का मौसम जैसा बना हुआ है कभी कभी तेज बारिश भी हो जाती है दिनभर बादल ढका हुआ है। ऐसे जलवायु परिवर्तन प्रत्येक तीस वर्षों के अंतराल में होता है, मानसून के पहले की इस बादलों से ढका हुआ मौसम और हल्की बारिश की फूहारों में लोग पर्यटन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे समय में देश के सांस्कृतिक, प्राकृतिक, प्राचीन, धार्मिक आदि पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। प्री-मानसून का मौसम मार्च से मई तक होता है, जो पर्यटकों को प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करने का समय होता है इस दौरान हल्की बारिश के कारण बहुत सी प्राकृतिक स्थलों की हरियाली और सूंदरता बढ़ जाती हैं। छत्तीसगढ़ में धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों जैसे - दामाखेड़ा, भोरमदेव, सिरपुर, ताला, मल्हार, तीरथगढ़ जलप्रपात है जहां लोग अपने परिवार के साथ छुट्टियों का आनन्द ले रहे हैं।पर्यटकों को आकर्षित करता है प्री मानसून सीजन
सोमवार, 26 मई 2025
सदगुरु कबीर साहेब के 627वें प्रगट उत्सव और बरसाईत महोत्सव पर करोड़ों भक्तों में उत्साह : उमराव सिंह वर्मा
सदगुरु कबीर साहेब के 627वें प्रगट उत्सव और बरसाईत महोत्सव पर करोड़ों भक्तों में उत्साह : उमराव सिंह वर्मा
सतगुरु कबीर साहब के सिद्धांतों और वाणीवचनों का अनुसरण और अनुकरण पूरे विश्व में किया जाता है साहेब कबीर के प्रकट उत्सव को ही बरसाईत महोत्सव के रूप में मनाया जाता है इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या 26 मई सोमवार से ज्येष्ठ पुर्णिमा तक 627वें प्रगट उत्सव एवं बरसाईत महोत्सव के अवसर पर कबीरपंथियों में काफी उत्साह एवं हर्षोल्लास है इस अवसर पर मानववैज्ञानिक एवं परामर्शदाता उमराव सिंह वर्मा ने कहा कि प्रतिवर्ष बरसाईत महोत्सव ज्येष्ठ अमावस्या से लेकर ज्येष्ठ पूर्णिमा तक 15 दिनों का होता है इसके अंतर्गत पुरे विश्व में सदगुरु कबीर साहब के मानने वालों के द्वारा विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें सत्संग समारोह, गुरु महिमा पाठ, संत महात्माओं के द्वारा भजन गायन, प्रवचन, भोजन भंडारा मिठाई वितरण, भव्य शोभा यात्रा, महाप्रसादी, शरबत वितरण, सम्मान समारोह, चौका आरती आदि के द्वारा सदगुरु कबीर साहब के प्रगट उत्सव और बरसाईत महोत्सव को बहुत ही विशेष महत्व और गरिमामय ढंग से मनाया जाता है कबीर साहब ने मध्यकालीन समाज में व्याप्त बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड पर तीखा प्रहार करते हुए सबसे पहले सामाजिक ऊंच-नीच, सामाजिक बुराईयों, जाति प्रथा, भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाएं, साहेब कबीर के विचारों, शिक्षाओं, सिद्धांतों और वाणिवचनों का आज विश्व के करोड़ों लोगों द्वारा अनुसरण और अनुकरण किया जा रहा है और तमाम तरह के अंधविश्वासों, बुराईयों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि साहेब कबीर दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाएं हैं वे प्रेम, दया, करूणा और भक्ति पर जोर देते हैं। आज भारतीय समाज पर सद्गुरु कबीर साहब के सिद्धांतों का महत्वपूर्ण प्रभाव देखा जा सकता है। सदगुरु कबीर साहब के वाणिवचनों, सिद्धांतों और शिक्षाओं का प्रथम प्रचार प्रसार उनके प्रधान शिष्य धनी धर्मदास जी साहब एवं वंश बयालीस के परंपरा के अनुसार हो रहा है, क्योंकि सदगुरु कबीर साहब की समस्त वाणी-वचनों का संकलन और उसे लिपिबद्ध करने का कार्य धनी धर्मदास जी साहब के द्वारा किया गया। आज श्री सदगुरू कबीर धर्मदास वंशावली प्रतिनिधि सभा दामाखेड़ा जो कबीरपंथ का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय एवं तीर्थस्थल है यहां पुरे विश्व से सदगुरु कबीर साहब के नेमी प्रेमी भक्तजन प्रतिवर्ष पधारते हैं और वंश बयालीस परंपरा के अनुसार पन्द्रहवे वंशाचार्य परम पूज्य पंथश्री हुजूर प्रकाशमुनि नाम साहब एवं सोलहवें नवोदित वंशाचार्य परम पूज्य पंथश्री उदितमुनि नाम साहब विराजमान हैं। और सदगुरु कबीर साहब के उपदेशों और सिद्धांतों का अनुकरण एवं अनुकरण पुरे विश्व में होने के साथ-साथ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, लोग नैतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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रविवार, 18 मई 2025
हम माली हैं पुण्य धरा के
*हम माली हैं पुण्य धरा के*
-उमराव सिंह वर्मा
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
हम सब मिलकर एक बने अब, पुकार रही है धरती हृदय से।
पानी बिन सब सूना पड़ा है, आओ लगाएं पेड़ जतन से।
तपती दहकती इस ज्वाला को, आओ हम शांत करें पेड़ों से।
जंगल भी अब सीमट रहे हैं, नदी तरू सब सूख रहे हैं
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
नन्हे नन्हे पौधों से अब, आओ धरा का श्रृंगार करें हम।
अनाचार ने लूटी है मानवता, आओ मिलकर मिटाएं जड़ से।
सूख रही है धरती आज, टूट रहा परिवार बहुत है।
जीवों का आशियाना टूटा, गौ माता दर दर भटक रही हैं।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
जब होगी यह पुण्य धरा में, मानवता का संचार तेजी से।
तब हम सीना तान कहेंगे, हम सब आज एक बने हैं।
कोई दानव तोड़ ना ले, हमारी खुशियां इस उपवन से।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
हम माली हैं पुण्य धरा के, आओ सींचे नीर गगन से।
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