शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

संस्कारों से ही बचेंगे टूटते परिवार

        आज परिवार का स्वरुप छोटा होता जा रहा है और आधुनिकता के युग के नाम पर बच्चों में इंटरनेट का अनावश्यक उपयोग, दौड़ती हुई जिंदगी आदि के कारण बच्चों पर नियंत्रण के माध्यम कम होता जा रहा है| संसार की समस्त सभ्यताओं में भारतीय संस्कार ही सबसे उत्तम माना गया है, क्योंकि इसी संस्कार ने बड़े-बड़े बुद्धजीवीयों, देशभक्तों, महान समाज सुधारकों को जन्म दिया है, परन्तु आज यही भारतीय परिवार लगभग हर तरफ तेजी से टूटता हुआ नज़र आता जा रहा है| टूटते हुए परिवारों की संख्या तो बढ़ ही रही है साथ साथ इन परिवारों के सदस्यों में आपसी प्रेमभाव की कमी और सामंजस्यता का नहीं होना, धूम्रपान और मद्यपान का सेवन आदि आपराधिक प्रवित्तियों को पैदा करता जा रहा है |
        भारतीय शाकाहारी भोजन स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम है और कहा गया है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क होता है और जब मानव मस्तिष्क शांत और स्वस्थ होगा, तब वह मानव की तमाम आपराधिक प्रवृत्तियां स्वतः समाप्त हो जाएगी और तब होगा विश्व में शांति | 
         विश्व में शांति हो, विश्व का कल्याण हो, यह मनोकामना ऐसे ही नहीं आएगी हमें अपने घर से प्रारंभ करना होगा, जब हमारा एक परिवार शांत और सुखी रहेगा | तब समाज, देश और विश्व में शांति होगी, परंतु आज लगभग हर पड़ोसी में किसी न किसी बात से अशांति है | आज के लगभग अधिकतर परिवारों में शराब, गुटका, मांसाहार और वाणी में अपशब्द और गाली गलौज है | हम जितने सम्मान पूर्वक और प्रेम से बाहर वालों से बात करते हैं उतने प्रेम से घर वालों से बात नहीं करते बल्कि घर वालों से बात करने या माता-पिता भाई-बहन से कुछ पूछे जाने पर चिड़चिड़ाहट युक्त आवाज मुंह से निकलती है | हम जितना समय और अपने काम और बाहर को देते हैं घर परिवार को नहीं देते |
आज की पीढ़ी अपने घर में माता-पिता का नहीं सुनते तो बाहर वालों की बात का अनुसरण हो जाने की कल्पना नहीं की जा सकती| आज भोजन के हर निवाले में विशेष प्रकार के रसायन हैं, केमिकल कीटनाशक है, एक बेफिजूल खर्चा भी है कि हम अधिक पैदावार के लिए फसलों में नई-नई रसायन का उपयोग कर रहे हैं| यह रसायन मानव शरीर को रोगी बनाने के साथ-साथ मिट्टी, पानी, हवा, भोजन सबको प्रभावित या बीमार कर रहा है और बीमार मस्तिष्क में ही अपराध प्रवित्ति पैदा होता है तो इस रसायनों पर खर्च करके हमें क्या मिला? रोग, कमजोरी और फिर अशांति | आज आवश्यक हो गया है कि हम नैतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक कृषि या प्राकृतिक कृषि की ओर बढ़े, जिसमें किसी भी रसायन का उपयोग ना हो, और शिक्षा, कृषि, व्यवहार आदि में नैतिकता युक्त संस्कार को शामिल करके ही विश्व में शांति लाई जा सकती है | मानव जीवन में शिक्षा का उद्देश्य केवल बड़ी बड़ी मशीन तैयार करना नहीं है| रोबोट शेयर बाजार और अंधाधुन चकाचौंध में नहीं है बल्कि शिक्षा का उद्देश्य लोगों के बीच आपसी भाईचारा, समझ, प्रेम और शांति निश्चित करना है कोई देश कितना भी बड़ा अर्थव्यवस्था बन जाए, यदि वहां के लोगों में चैन और सुकून की नींद नहीं है और सुकून भरा जीवन नहीं है तो तमाम वैज्ञानिक विकास बेकार है इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में माननीय संस्कार की आवश्यकता है यदि हम मानव हैं तो मानव होने का लक्षण विकसित करना जरूरी है एक सभ्य समाज में असभ्यता का आ जाना एक बहुत बड़ा दाग है वह दाग हमें अपने भोजन और जीवन और विश्व के प्रति गंभीर नहीं होने का प्रमाण देता है |

– उमराव सिंह
ग्राम- सेमरिया (जिला- बेमेतरा) छत्तीसगढ़

Reference : umrao singh verma, www.dharmavani.com 08/04/2022

मंगलवार, 1 मार्च 2022

सद्गुरु कबीर साहब की वाणीवचन Sadguru Kabir Sahab

 

जिस दिन पूरी दुनिया सद्गुरु कबीर साहब के बताएं मार्ग पर चलने लग जाएगी, जिस दिन संसार का हर एक एक इंसान सद्गुरु कबीर साहब के वाणीवचनों को समझकर उसी मार्ग का अनुसरण और अनुकरण करने लगेगा, ना किसी परिवार में और ना ही कहीं दुनिया में लड़ाई झगड़ा, कोर्ट कचेहरी और महा भयानक युद्ध का नौबत नहीं आएगी |
🙏 सादर सप्रेम साहेब बंदगी 🙏

- #उमराव_सिंह_वर्मा_सामाजिक_मानववैज्ञानिक

The day the whole world will start following on the path told by Sadguru Kabir Sahib, on the day every single person in the world will understand the words of Sadguru Kabir Sahib and follow the same path, neither in any family nor in the world. There will be no quarrel, courtroom and great terrible war.

Regards Saprem Saheb Bandgi🙏

- #Umrao_Singh_Verma_Social_Anthropologist

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

इस साल कुछ अलग होली



इस बार होली कुछ अलग ढंग से मनाइए, यह एक पावन त्यौहार है बस सब खुद से एक वादा कीजिए कि इस होली में शराब नहीं पिएंगे, नशा नहीं करेंगे, बल्कि अपने अपने गांव में खुशी से होली मिलन समारोह मनाएंगे, होली मिलन समारोह लिखा हुआ एक बैनर बनाइये जिसे गांव के मुख्य चौक में लगा दीजिए, नीचे नंगारा के साथ फाग गीत का माहौल बनाइये, डंडा नृत्य का आयोजन कीजिए क्योकि धीरे धीरे शराब के कारण फाग गीत और डंडा नृत्य विलुप्त हो रहा है | वहीं आसपास कुर्सियां सजा सकते हैं जिसके सामने खूब सारे रंग बिरंगे ग़ुलाल को सजाकर रख  सकते हैं हो सके तो फाग गीत के लिए साउंड सिस्टम की व्यवस्था कर सकते है एक अच्छी संस्कृति को संस्कार के साथ मनाएं और फाग और डंडा नृत्य के सुन्दर माहौल में सब साथ बैठिए,और रंग ग़ुलाल का आनंद लीजिए... 


उमराव सिंह वर्मा 

गोल्डमेडल, सामाजिक मानववैज्ञानिक 

🙏🙏🙏🙏