चिरकुटी देव
गांव सेमरिया के चारों तरफ के सीमा पर एक देव स्थल है जहाँ पर चिरकुटी देव स्थापित है मान्यता है कि ग्राम के सीमा पर इस देव स्थल के होने से बाहर से कोई भी बिमारी या महामारी गांव में प्रवेश नहीं करता । यह गांव के पशु पक्षी, फसलों व मनुष्यों की तमाम तरह के बीमारियों से रक्षा करती है । दुसरे गांवों के बुजुर्ग भी बतातें हैं कि लगभग सभी गांवों के सीमाओं में गांव के रक्षा हेतु देवस्थल होते हैं परंतु वर्तमान में धीरे धीरे ऐसी मान्यताएं विलुप्त होती जा रही हैं। इस देवस्थल से गुजरने वाले जानकार राहगीर इस पर पत्थर चढाकर चरण स्पर्श करते हैं।
लेखक - उमराव सिंह
सांस्कृतिक मानववैज्ञानिक

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