त्रेतायुग के समय अपने देश या अपने राज्य छत्तीसगढ़ के जमीन पर क्या क्या हुआ, इस इतिहास को जानना जितना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि हम उस त्रेतायुग और द्वापरयुग से शिक्षा लेकर हम अपने वर्तमान को ठीक करें...
*क्योंकि हम सभी को आज में जीना है हमें अपने आज के समाज और आज के अपने परिवार में रहकर जीवन बिताना है इसलिए जरूरी है कि हम अपने आज के परिवार और समाज में नकारात्मक बदलाव जो हो रहा है मतलब सामाजिक पारिवारिक विघटन । उसी के सुधार के लिए ही धार्मिक पौराणिक तथ्यों से* *नैतिक शिक्षा लेकर अपने वर्तमान के नकारात्मक परिस्थिति को ठीक कर सके, शायद इसीलिए जगह जगह भागवत, प्रवचन और तमाम तरह के धार्मिक अनुष्ठान हम कराते हैं ताकि ईश्वर के दया से हमारा आज और आने वाला कल अच्छा रहे, शायद इसी उम्मीद से हर परिवार अपने बच्चों का विवाह *रामनवमीं में या धार्मिक महत्व के दिनों में करते हैं और अपने बेटा - बहू में या बेटी - दामाद में भगवान श्रीराम चन्द्र जी, और माता सीता या भगवान शिव- पार्वती की छवि देखते हैं और अच्छे भविष्य की कामना करते हैं ।*
*परसो मैं न्यायालय में एक परिवार का तलाक और भरण-पोषण की सुलह समझौता का काम कर रहा था उसी समय आफिस के बाहर एक परिवार का शादी का बाजा बजते हुए जा रहा था क्योंकि कल बहुत से जगहों में तेल था तो तेल या माटी कोडने जा रहे थे और बिहाव का बाजा सूनकर मन में एक अलग ही बिहाव रस आता है।*
*तो अचानक मेरे मन में ये ख्याल आया कि एक तरफ शादी हो रही है और दूसरी तरफ शादीयां टूट रही है* ।
*हे मालिक ! आपने ये कैसी परिस्थितियों का निर्माण किया है कि विवाह का बंधन कमजोर होता जा रहा है और शादीयां टुट रही है।*
*क्यों आज के बेटे में राम नहीं है और बेटी में सीता नहीं है ? इसका कारण क्या है ? और हम टुटते हुए परिवारों को कैसे कम कर सकते हैं ? लाखों रूपयों का खर्च करके जीवन भर के मेहनत से जुटाई गई पैसे से माता-पिता शादी ब्याह करते हैं और कुछ ही दिनों में और कुछ ही महीनों में तलाक आदि की स्थिति आ जाती है *हम सभी को इस पर मनन, चिंतन और मेहनत करनी चाहिए, यदि हमें अपने बच्चों का अच्छा भविष्य देखना है।*
*- उमराव सिंह, काउंसलर, बेमेतरा* *दिनांक 31/03/2023*
🙏🏻 *©umraosingh__________________________*
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