सोमवार, 11 मई 2020

सूबह कौआ दिखा

"सुबह कौआ दिखा"
                     - उमराव सिंह

रोज की तरह आज सुबह साढे पांच बजे जब मैं छत पर गया, और कुछ देर ध्यान, आलोम विलोम और भ्रामरी का दौर चल रहा था उठा तो दुसरे छत पर दो कौएं दिखाई दिए, सच मानिए मैं बहुत वर्षों बाद कौंआ देखा, जब 1990- 91 में शुरू शुरू स्कूल जाना शुरू किए थे उस समय गांव के घर में और आसपास बहुत अधिक संख्या में कौआ आते थे बचपन में जब भात का अंगरा रोटी खाते बैठे रहते थे तो कौआ आसपास में कांव कांव अवश्य करते रहता था और हम बच्चे उसे रोटी का टुकरा दे दे कर खुश होते थे... मैने नीचे गया और कुछ चावल और एक बर्तन में पानी लाकर छत में रख दिया,
हमारा बेमेतरा फैक्टरी वाला औद्योगिक क्षेत्र नहीं है वास्तव में अभी इधर चिडिय़ा विलुप्त नहीं हुए हैं परंतु संख्या अवश्य कम हो गया है, बेमेतरा कृषि उद्योग क्षेत्र हैं यहाँ मुख्यतः खेती होती है चना के उत्पादन के लिए ये क्षेत्र प्रसिद्ध है इस तरह खेत खलिहान होने के कारण यहाँ पेड पौधों और हरियाली की मात्रा पर्याप्त है तो चिडियों का चहचहाना भी स्वाभाविक है
मगर औद्योगिक क्षेत्रों में जहाँ बडी बडी कंपनियां बनी, और इनसे निकले हुए धुएं, प्रदुषण, मोटर गाडियों के धुएं, विविध मोबाइल टावर के तरंगे चिडियों के जीवन के लिए खतरा बना हुआ है इस विषय को हाल ही में एक फिल्म में देखाया भी गया हैं
कोयल की आवाज तो सुबह से आ रही है, सुबह के चिर शांत वातावरण में जब कोयल की आवाज गुंजायमान होती है इससे सभी भलिभांति परिचित हैं, आप भी अपने आसपास अनुभव किए होंगे कि कुछ दिनों से चिडियों की चहचहाना फिर से सुनाई देने लगी है एक उम्मीद की पृथ्वी में छाई हुई प्रदुषण का घोर अंधेरा कहीं गायब हो जाए, कुछ दिन पहले पढने को मिला था ओजोन परत में हुआ छिद्र पुनः ओजोन यूक्त हो रहा है कितनी सच्चाई है ये वैज्ञानिक पुष्टि करेंगे, परंतु ये तमाम चीजें आम जनसमुदाय को समझना आवश्यक है कि हम अपने भौतिक सुख सुविधा के लिए कितने खतरनाक चीजों के उपयोग को बढावा दिए हैं बच्चे सदियों से पढते आ रहे है कि फ्रिज, एसी, प्रकृति में सीएफसी गैस प्रवाहित करती है जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाया है और तापमान निरंतर बढा है विकिपीडिया के अनुसार "क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) एक कार्बनिक यौगिक है जो केवल कार्बन, क्लोरीन, हाइड्रोजन और फ्लोरीन परमाणुओं से बनता है। सीएफसी का इस्तेमाल रेफ्रिजरेंट, प्रणोदक (एयरोसोल अनुप्रयोगों में) और विलायक के तौर पर व्यापक रूप से होता है।ओजोन निःशेषण में इसका योगदान देखते हुए, सीएफसी जैसे यौगिकों का निर्माण मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया गया है। सीएफसी के द्वारा ओजोन परत को नुकसान होता हैंं"
इस बात को हर बच्चा बच्चा जानता है वो निबंध लिखा है मगर वो आज वो जानबूझकर एसी के बिना रह नहीं सकता, फ्रिज के बिना रह नहीं सकते,
तो गलती कौन कर रहा है
क्या उत्पादक , नहीं, किसी वस्तु का निर्माण विज्ञान ही करता है लेकिन विज्ञान द्वारा निर्मित उस वस्तु का उपयोग तब संभव होता है जब उसे समाज और जनसमुदाय के द्वारा हरी झंडी मिल जाती है अर्थात लोग ऊसका अत्यधिक उपयोग करने लग जाते हैं और एक व्यापार चल पडता है ...
ओह देर हो रही है आगे कभी और...

धन्यवाद, सप्रेम साहेब बंदगी...

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