*पढाई कैसे करें...*
- _उमराव सिंह_
पढाई करने का तरीका, यहाँ दो चीजें ध्यान देने वाली है कि हमें अपने कक्षा का कोर्स को किस तरह पढना चाहिए जिससे हमें चेप्टर का कोई टॉपिक अच्छे से याद रहे, या समझ में आ जाए क्योंकि किसी कॉन्सेप्ट को समझ जाने के बाद याद करने या रटने की जरूरत नहीं पडती, और दुसरी चीज की हमें अपना पढाई को कैरियर बनाने के लिए किस तरह से आगे बढना चाहिए।
एक उदाहरण से बात शुरू करते हैं मेरा एक दोस्त है वो दसवीं के बाद ग्यारहवीं में बायो लिया था अब क्या मन हुआ तो बारहवीं के बाद आईटीआई कर लिया कोपा में, अब आईटीआई के बाद बीएससी में एडमिशन लिया, बीएससी के साथ साथ टाइपिंग क्लास जाता था अब बीएससी के बाद पीजीडीसीए और अभी राजनीति में प्राइवेट एम.ए किया पर किसी में फस्ट डीवीजन नहीं ला पाया, क्योंकि वही, सॉटकट की पढाई...
परीक्षा के दो चार दिन पहले पतली पतली गाइड खरीद लेता था और उसमें आईएमपी समझ के केवल पांच छह प्रश्न पढ लेता था तो ऐसा पढने से यदि अच्छा प्रतिशत आ भी जाए तो विषय का नॉलेज या विषय में पकड नहीं रहता।
अब ऐसा पढने से उसे स्वयं समझ में नहीं आ पाता कि वो किस फिल्ड में कैरियर बनाना चाहते हैं।
हां, कुछ दिन वो पीएससी का कोचिंग भी किया... पर कुछ नहीं मिला...
तो ऐसा पढाई केवल पैसा खर्च करना है इससे साफ पता चलता है कि आपने अपना एक लक्ष्य नहीं बनाया है और हां, आजकल के कॉम्पीटिशन के दौर में लक्ष्य बनाना मुश्किल होता है कि हर विषय के पढे लिखे लोगों को आसपास बेरोजगार देख रहे होते हैं, इसलिए पढाई में गंभीर नहीं रहते,
तो ये आइडिया गलत है...
आप कभी भी पढाई कीजिए केवल एक दिशा में पढाई करे़ मलतब जिस विषय में आपका वास्तव में रूचि है बारहवीं या दसवीं के बाद उसी को चयन कीजिए और उसी विषय में जितना आगे तक पढाई होती है पढने की कोशिश कर सकते है जैसे यदि दसवीं के बाद इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र या पत्रकारिता जो भी लिए हैं तो आगे इसी में स्नातक मतलब बी.ए. किए, फिर इसमें से जिसमें रूचि है उसी में एम.ए., एम.फिल., पीएचडी, और रिसर्च लेवल तक, जहाँ तक आप पहुंच पाएं, एक लाइन में पढाई करना चाहिए। और पढाई को जीवन में कभी भी पतली पतली गाइड से मत कीजिए, हमेशा अपने विषय की किताबें पढिए उन मोटी मोटी किताबों को ऐसे ही सो पीस के लिए नहीं छापा गया है, इससे आपको उस विषय का रियल नॉलेज और विषय में पकड रहेगी तो भविष्य में उस विषय का विषय विशेषज्ञ बन सकते हैं जैसे यदि आप बारहवीं बायोलॉजी के बाद भूगर्भ शास्त्र या फोरेंसिक साइन्स ले लिए तो उसी में आगे बढिए, यदि कम्प्यूटर में रूचि है तो केवल उसी में, संगीत, पेंटिंग, डिजाइनिंग कुछ भी करें केवल एक रास्ते में बढे... और जिस विषय में आगे बढना है उसी में गहन अध्ययन करें...
अब दुसरी बात में आतें हैं कि कैसे पढना चाहिए, अपने पढाई करने वाले कमरे में एक कागज पर लिखकर चिपका दीजिए
*1.*पढाई, 2. मनन, 3.लेखन 4. स्व आकलन**
मतलब किसी चेप्टर जो आपको पढना है बिल्कुल फ्री होकर सरसरी तौर एक बार पढ लीजिए फिर किताब बंद कर दीजिए, अब टहलते हुए या कुछ काम करते हुए, या ध्यानमुद्रा में बैठकर आपने कुछ देर पहले जो पढा है उसी को मनन कीजिए, आपको पहली बार में ध्यान में नहीं आएगा, पर धीरे धीरे दिमाग में कुछ टुटा फूटा सा या बिल्कुल लाइन बाइ लाइन दिमाग में आने लगेगा..
फिर जब पुरा मनन हो जाए, तो उसको बिना देखे लिखने की कोशिश कीजिए, आपसे जैसा टुटा फूटा लिखाए, बस लिखते जाइए...
फिर उसी लिखे हुए को पढे हुए से मिलाइए... इस विधि से पढाई करने से आपका स्कूल, कॉलेज या प्रतियोगिता परीक्षा के टॉपिक्स भी बडी आसानी से तैयार होता है
.... तो एक बार कोशिश जरूर कीजिए...
- उमराव सिंह
umraosinghverma.blogspot.com
- _उमराव सिंह_
पढाई करने का तरीका, यहाँ दो चीजें ध्यान देने वाली है कि हमें अपने कक्षा का कोर्स को किस तरह पढना चाहिए जिससे हमें चेप्टर का कोई टॉपिक अच्छे से याद रहे, या समझ में आ जाए क्योंकि किसी कॉन्सेप्ट को समझ जाने के बाद याद करने या रटने की जरूरत नहीं पडती, और दुसरी चीज की हमें अपना पढाई को कैरियर बनाने के लिए किस तरह से आगे बढना चाहिए।
एक उदाहरण से बात शुरू करते हैं मेरा एक दोस्त है वो दसवीं के बाद ग्यारहवीं में बायो लिया था अब क्या मन हुआ तो बारहवीं के बाद आईटीआई कर लिया कोपा में, अब आईटीआई के बाद बीएससी में एडमिशन लिया, बीएससी के साथ साथ टाइपिंग क्लास जाता था अब बीएससी के बाद पीजीडीसीए और अभी राजनीति में प्राइवेट एम.ए किया पर किसी में फस्ट डीवीजन नहीं ला पाया, क्योंकि वही, सॉटकट की पढाई...
परीक्षा के दो चार दिन पहले पतली पतली गाइड खरीद लेता था और उसमें आईएमपी समझ के केवल पांच छह प्रश्न पढ लेता था तो ऐसा पढने से यदि अच्छा प्रतिशत आ भी जाए तो विषय का नॉलेज या विषय में पकड नहीं रहता।
अब ऐसा पढने से उसे स्वयं समझ में नहीं आ पाता कि वो किस फिल्ड में कैरियर बनाना चाहते हैं।
हां, कुछ दिन वो पीएससी का कोचिंग भी किया... पर कुछ नहीं मिला...
तो ऐसा पढाई केवल पैसा खर्च करना है इससे साफ पता चलता है कि आपने अपना एक लक्ष्य नहीं बनाया है और हां, आजकल के कॉम्पीटिशन के दौर में लक्ष्य बनाना मुश्किल होता है कि हर विषय के पढे लिखे लोगों को आसपास बेरोजगार देख रहे होते हैं, इसलिए पढाई में गंभीर नहीं रहते,
तो ये आइडिया गलत है...
आप कभी भी पढाई कीजिए केवल एक दिशा में पढाई करे़ मलतब जिस विषय में आपका वास्तव में रूचि है बारहवीं या दसवीं के बाद उसी को चयन कीजिए और उसी विषय में जितना आगे तक पढाई होती है पढने की कोशिश कर सकते है जैसे यदि दसवीं के बाद इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र या पत्रकारिता जो भी लिए हैं तो आगे इसी में स्नातक मतलब बी.ए. किए, फिर इसमें से जिसमें रूचि है उसी में एम.ए., एम.फिल., पीएचडी, और रिसर्च लेवल तक, जहाँ तक आप पहुंच पाएं, एक लाइन में पढाई करना चाहिए। और पढाई को जीवन में कभी भी पतली पतली गाइड से मत कीजिए, हमेशा अपने विषय की किताबें पढिए उन मोटी मोटी किताबों को ऐसे ही सो पीस के लिए नहीं छापा गया है, इससे आपको उस विषय का रियल नॉलेज और विषय में पकड रहेगी तो भविष्य में उस विषय का विषय विशेषज्ञ बन सकते हैं जैसे यदि आप बारहवीं बायोलॉजी के बाद भूगर्भ शास्त्र या फोरेंसिक साइन्स ले लिए तो उसी में आगे बढिए, यदि कम्प्यूटर में रूचि है तो केवल उसी में, संगीत, पेंटिंग, डिजाइनिंग कुछ भी करें केवल एक रास्ते में बढे... और जिस विषय में आगे बढना है उसी में गहन अध्ययन करें...
अब दुसरी बात में आतें हैं कि कैसे पढना चाहिए, अपने पढाई करने वाले कमरे में एक कागज पर लिखकर चिपका दीजिए
*1.*पढाई, 2. मनन, 3.लेखन 4. स्व आकलन**
मतलब किसी चेप्टर जो आपको पढना है बिल्कुल फ्री होकर सरसरी तौर एक बार पढ लीजिए फिर किताब बंद कर दीजिए, अब टहलते हुए या कुछ काम करते हुए, या ध्यानमुद्रा में बैठकर आपने कुछ देर पहले जो पढा है उसी को मनन कीजिए, आपको पहली बार में ध्यान में नहीं आएगा, पर धीरे धीरे दिमाग में कुछ टुटा फूटा सा या बिल्कुल लाइन बाइ लाइन दिमाग में आने लगेगा..
फिर जब पुरा मनन हो जाए, तो उसको बिना देखे लिखने की कोशिश कीजिए, आपसे जैसा टुटा फूटा लिखाए, बस लिखते जाइए...
फिर उसी लिखे हुए को पढे हुए से मिलाइए... इस विधि से पढाई करने से आपका स्कूल, कॉलेज या प्रतियोगिता परीक्षा के टॉपिक्स भी बडी आसानी से तैयार होता है
.... तो एक बार कोशिश जरूर कीजिए...
- उमराव सिंह
umraosinghverma.blogspot.com
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें